शनिवार, 14 मार्च 2009

मौसम

यहाँ बेवक्त ,बेमौसम
बदल छा गए हैं ।
सब कुछ ढंका -ढंका सा है ,
मन भी ।

हालाँकि शहर के बीचों बीच
अब भी कई पलाश हैं जो दहक रहे हैं ,
वैसे मौसम तो दहकते पलाशों का ही है
तुम्हारे शहर का मौसम कैसा है ...?

ढंके ढंके से इस मौसम में
एक आंच से ,
कुछ अनदेखे ,अनजाने
अनबुने और शायद अनचाहे भी
खदबदा रहे हैं सपने

वैसे ये सपनों का मौसम तो नहीं ।
तुम्हारे यहाँ मौसम कैसा है ...?
मन का .

11 टिप्‍पणियां:

  1. ढंके ढंके से इस मौसम में
    एक आंच से ,
    कुछ अनदेखे ,अनजाने
    अनबुने और शायद अनचाहे भी
    खदबदा रहे हैं सपने।

    वैसे ये सपनों का मौसम तो नहीं ।
    सुन्दर भाव।

    कहते हैं कि -

    अपने सारे खोये मैंने सपने तुम न खोना।
    होना जो था हुआ आजतक बाकी अब क्या होना?

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  2. आपका प्रोफाइल परिचय और आपकी रचना दोनों बेजोड़ । धन्यवाद ।
    फैन हो गया मैं आपका ।

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  3. ढंके ढंके से इस मौसम में
    एक आंच से ,
    कुछ अनदेखे ,अनजाने
    अनबुने और शायद अनचाहे भी
    खदबदा रहे हैं सपने।

    बहुत बढ़िया ..

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  4. बहुत खूबसूरत रचना...
    दहकते पलाश के मौसम के मिजाज़ वाली अनुभूति...

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  5. हालाँकि शहर के बीचों बीच
    अब भी कई पलाश हैं जो दहक रहे हैं ,
    वैसे मौसम तो दहकते पलाशों का ही है
    तुम्हारे शहर का मौसम कैसा है ...?

    बहुत शशक्त अभिव्यक्ति है,........
    प्रभावी रचना

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  6. seema ji ,

    bahut hi prabhaavshaali aur sashakt rachna , specially ye waali pankhtiyaan ..
    ढंके ढंके से इस मौसम में
    एक आंच से ,
    कुछ अनदेखे ,अनजाने
    अनबुने और शायद अनचाहे भी
    खदबदा रहे हैं सपने।

    वैसे ये सपनों का मौसम तो नहीं ।
    तुम्हारे यहाँ मौसम कैसा है ...?
    मन का .

    man ko chooti hui aur dil ke raaho se gujarti hui rachna ..

    padhkar , man kahin rukha hua sa hai ....

    aapko der saari badhai ,itne acche lekhan ke liye ....

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  7. वैसे ये सपनों का मौसम तो नहीं ।
    तुम्हारे यहाँ मौसम कैसा है ...?
    मन का .

    वाह...अद्भुत रचना है आपकी...बधाई....
    नीरज

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  8. ढंके ढंके से इस मौसम में
    एक आंच से ,
    कुछ अनदेखे ,अनजाने
    अनबुने और शायद अनचाहे भी
    खदबदा रहे हैं सपने।

    इस पार से उस पार का मौसम ...
    और उस पर आपका ये शानदार कहन....
    मन की बातें.. शब्दों में ढल आई हों जैसे .....

    बधाई. . . . . .
    ---मुफलिस---

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  9. आपसब की टिप्पणियाँ मेरा उत्साह बढाती है .आप लोगों के प्यार को केवल धन्यवाद से ही चुकाया नहीं जा सकता फिर भी बहुत्बहुत धन्यवाद .

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