सोमवार, 16 मार्च 2009

ब्लॉग मित्रों ,
आप लोगों की उत्साहवर्धक टिप्पणियों के प्रताप से मुझमें भी आपनी नई-पुरानी रचनाओं को पोस्ट किए चले जाने का चस्का लग गया है सो आपलोग अब अपनी करनी का फल प्राप्त करो..... और एक रचना झेलो -

मैं

गर्म ,तपती हुई रेत पर ,
पानी की एक बूँद,
मैं ,
गिरी तो क्षण भर में ,
समाप्त हो गई ।
समाप्त हो गया मेरा अस्तित्व ।

कौन जाने
क्यों ...?
कहाँ ...?
कब ...?
कैसे ...?
गिरी वह बूँद ,
और फ़िर मरुभूमि में गिरकर ,
क्या बनी...?
मैं भी नहीं जानती मेरा क्या होगा ।
बदल बन के बरसने की सामर्थ्य नहीं मुझमें ।
शायद कहीं ....
फूलों पर शबनम की बूँद बनकर ,
या फ़िर
दूब की नोक पर तुहिन कण सी ,
चमकुंगी केवल सुबह -सवेरे ।

लेकिन .......
कौन जानेगा मुझे ...?
पहचानेगा मुझे ...?
कि
मैं वही मरू भूमि में गिर पड़ी एक बूँद हूँ ।

किंतु तुम पहचान लेना ।
हर एक बूँद ,जो ओस है या आंसू है ,
मेरा ही सर्वांश है ,यह जान लेना ।

और फ़िर तुम देखना ,
कैसे झरते -झरते हंसूंगी मैं ,
और हंसते -हंसते झरूँगी मैं .

14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!वाह!वाह आपकी कविताओं का एक और दीवाना हुआ बहुत ही खूब

    और फ़िर तुम देखना ,
    कैसे झरते -झरते हंसूंगी मैं ,
    और हंसते -हंसते झरूँगी मैं .


    वाह वाह वाह, आह!

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  2. आपकी कविताओं का एक और दीवाना होगया,किस पंति को छड़ूँ किसे तारीफ के लिये लूँ ? वाह् वाह वाह, आहा>>>>>>\

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  3. आपकी कविताओं में प्रवाह आकृष्ट करता है ।
    इस रचना के लिये धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. किंतु तुम पहचान लेना ।
    हर एक बूँद ,जो ओस है या आंसू है ,
    मेरा ही सर्वांश है ,यह जान लेना ।

    अच्छी लगी ये पंक्तियाँ।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  5. और फ़िर तुम देखना ,
    कैसे झरते -झरते हंसूंगी मैं ,
    और हंसते -हंसते झरूँगी मैं .

    --बहुत उम्दा!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. कैसे झरते -झरते हंसूंगी मैं ,
    और हंसते -हंसते झरूँगी मैं .

    ...wah !!
    Hindi kavita main kuch hi acchi kavita dekhne ko milti hai....
    apki unme se ek hai...

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  7. क्या बात है...वाह...बेजोड़ रचना है आपकी...पुरानी आपके लिए है लेकिन हम जैसों के लिए तो एक दम नयी है...और ऐसी विलक्षण रचनाएँ भी कभी पुरानी होती हैं?

    नीरज

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  8. kya baat hai seema ji ,

    ab ye purani ho ya nai ..
    hamen to bahut pasand aayi ..
    किंतु तुम पहचान लेना ।
    हर एक बूँद ,जो ओस है या आंसू है ,
    मेरा ही सर्वांश है ,यह जान लेना ।
    ultimate lines......................

    wah ji wah , badhai sweekar karen

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  9. बहूत बेहतरीन कविता..........
    आपकी कविता अक्सर कुछ कहती हुई लगती है, सुंदर अभिव्यक्ति है शब्दों की इस रचना मैं

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  10. neeraj ji, himanshu ji, नासवा जी, विजय जी ,अनिल जी ,बादल जी दर्शन जी ,उड़नतस्तरी जी श्यामल जी आप सबका बहुत बहुत आभार .

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  11. बहुत अच्छी रचना है । भाव और विचारों का बेहतर समन्वय है । इससे अभिव्यक्ति प्रखर हो गई है ।

    समय हो तो मेरे ब्लाग पर प्रकाशित रचना-आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-पढ़े और अपना कमेंट भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  12. वाहवा.. क्या बात है... इस खूबसूरत अभिव्यक्ति के लिये सीमा जी बधाई स्वीकारें..

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