बुधवार, 29 दिसंबर 2010


शुभ कामनाएं


लिखती हूँ तुम्हारा नाम
कई बार ............
गहरे नीले आकाश पर चमकते तारों से ,
बेतरतीब खिले हुए फूलों से ,
रेत से
और लहरों से भी .
कभी -कभी
अलसुबह पत्तियों पर पड़ी ओस से भी ,
लिखती हूँ तुम्हारा नाम
फिर -फिर .....
अनखुले गुलाबों की पंखुड़ियों पर ,
कुछ देर में उड़ जाने वाली चिड़िया के पंखों पर ,
अभी अभी उग आये सूरज की नर्म हथेलियों पर,
यहाँ तक की छुईमुई की बंद होती हुई पत्तियों पर भी
लिखती हूँ तुम्हारा नाम
कि

जब लहरें किनारों को छुएंगी,
ओस झर जाएगी पत्तों से .
गुलाब खिल जायेंगे ,
सूरज चमकने लगेगा .
चिड़िया उड़ जाएगी दूर.....
और खुल जाएँगी छुईमुई की पत्तियां
तब
शुभकामनाये पहुँच जाएँगी मेरी
तुम तक
जिनमें लिखा है मैंने
तुम्हारा नाम .

4 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीया सीमा रानी जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    बहुत सुंदर प्रेम कविता है -
    जब लहरें किनारों को छुएंगी,
    ओस झर जाएगी पत्तों से .
    गुलाब खिल जायेंगे ,
    सूरज चमकने लगेगा .
    चिड़िया उड़ जाएगी दूर.....
    और खुल जाएँगी छुईमुई की पत्तियां
    तब
    शुभकामनाये पहुँच जाएँगी मेरी
    तुम तक

    वाह वाऽऽह !

    लिखा है मैंने
    तुम्हारा नाम .

    क्या बात है…
    आपकी पुरानी पोस्ट्स में भी ख़ूबसूरत रचनाएं पढ़ कर मन मुग्ध हो गया । … और हां, आपका परिचय भी बहुत रोचक है … :)

    बसंत पंचमी की अग्रिम हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

    शस्वरं पर आपका हार्दिक स्वागत है , आइए…

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज मंगलवार 8 मार्च 2011 के
    महत्वपूर्ण दिन "अन्त रार्ष्ट्रीय महिला दिवस" के मोके पर देश व दुनिया की समस्त महिला ब्लोगर्स को "सुगना फाऊंडेशन जोधपुर "और "आज का आगरा" की ओर हार्दिक शुभकामनाएँ.. आपका आपना

    उत्तर देंहटाएं